पैसा – श्योराज बम्बेरवाल

पैसा – श्योराज बम्बेरवाल

भूमिका

किसी भी विषय पर काव्य रचना श्री श्योराज जी की विशेषता है। पैसे पर उनके विचार देखिए तो सही।

जब सवाल पैसों का हो तो,

कोई नहीं छोड़ता है

जब तक जिंदा रहता है नर,

धन को सदा जोड़ता है।

 

पैसों से होता है सब कुछ,

पैसों से सम्मान मिले।

पैसे वालों की ये दुनिया,

पैसों से पहचान मिले।

दो पैसों के लालच में ही,

नर सिरों को फोड़ता है

जब सवाल पैसों का हो तो,

कोई नहीं छोड़ता है।

 

पैसों से बनते हैं रिश्ते,

जिसका कोई पार नहीं।

पैसों के बिन मानव अब तो,

कर सकता व्यापार नहीं।

पैसों के लिए दिन भर यहां,

पत्थरों को तोड़ता है

जब सवाल पैसों का हो तो,

कोई नहीं छोड़ता है।

 

पैसों की दुनिया में मानव,

नैतिकता को भूल गया

पैसों को अब पाकर वो तो ,

आसमान में झूल गया।

सारी सी दुनिया को अब वो,

अपनी ओर मोड़ता है

जब सवाल पैसों का हो तो,

कोई नहीं छोड़ता है।

 

पैसों के पीछे ही मानव,

दिन भर सदा दौड़ता है

जिस जिसने जोड़ा है धन को,

उनका जग में नाम हुआ

जिसने दी है रिश्वत जग में,

जल्दी उसका काम हुआ।

जब सवाल पैसों का हो तो,

कोई नहीं छोड़ता है।

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’

खेड़ा मलूका नगर

‘मालपुरा’ टोंक (राजस्थान)

प्रस्तुति