मेरे कान्हा

मेरे कान्हा

मेरे कान्हा कुछ पंक्तियां, कान्हा के लिए। मोर मुकुट मुरलीधर की मनभावन, मनमोहन की मधुर धुन मधुरम- मधुरम प्रीत शरण है प्रीत झरण है प्रीत ही यमुना घाट पलकों के…
मृत्यु से भय कैसा!

मृत्यु से भय कैसा!

मृत्यु से भय कैसा! तन है मृत्युलोक का वासी मन है हर सुख का अभिलाषी तन को मिट्टी हो जाना है मन को प्रभु शरण आना है   मिट्टी है…
कविता

कविता

दर्द देकर नहीं मिलती ऊँचाई कभी किसी को दर्द देकर, खुद की राह मत सजाना। दूसरों के आँसुओं से, अपनी खुशी मत पाना।   दिल दुखाने वालों को, कभी दुआएँ…
‘सरस’ की सरल लेखनी

‘सरस’ की सरल लेखनी

🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹 संस्कारों की स्थिति संस्कार, दम तोड चुके हैं, सरकारी आचरणों में।   नियम और कानून बचे हैं, अब केवल संस्मरणों में।   अच्छे दिन वापस जा बैठे, भाषा के…
कविता को ध्यान में रखकर सृजित चित्र

कविता

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 ख़ामोशी के इस मंजर में! संवाद कहाँ रह गए भंग!! मस्तिष्क कपाट के बंजर में! आ रहा ना कोई भी रंग!! देख समूह की ख़ामोशी में! 'खटाना' हो रहा…
कविता

कविता

ख़ामोश तुमने बाग उजाड़े खामोशी से, वो देखता रहा तुमने जमीन खोदी गर्मजोशी से वो देखता रहा तुमने जलाए जंगल, आशियाने छीने वो खामोश रहा जानवरों की चीखें पहाड़ों का…

कविताएँ

सार छंद पर्यावरण उर में हम संकल्प जगाकर , घर- घर अलख जगाएँ । हरित धरा नीले अम्बर को फिर से हँसता पाएँ ।। वृक्षों की छाया है खोई, वापस…
मकर संक्रांत पर विशेष

मकर संक्रांत पर विशेष

मकर संक्रांति आया मकर संक्रांति का त्योहार, झूमे सारा संसार, नव उमंग भरने आया बसंत का संदेश लाया, आशाओं की किरणों से, सबके जीवन को जगमगाए, मध्यम मध्यम आंच पर…
कविता

कविता

उत्तरायण भीतर का सूर्योदय अंधकार से प्रकाश की ओर, यह क़दम बढ़ाना है, दक्षिणायन की निद्रा त्याग, अब जाग्रत हो जाना है। मकर राशि में सूर्य का प्रवेश, एक नया…
आगमन

आगमन

भूमिका नववर्ष का आगमन केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि आशा, नवचेतना और नवसृजन का उत्सव होता है। इसी भावभूमि पर प्रतिष्ठित वरिष्ठ रचनाकार आदरणीया प्रमिला त्रिवेदी जी की कविता 'आगमन'…