भूमिका प्रमिला त्रिवेदी की यह कविता आज की स्त्री केवल स्त्री की सामाजिक स्थिति पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि वह स्वयं लेखिका की गहन मानसिक यात्रा, अनुभवजन्य निष्कर्ष और परिवर्तन…
One Life, One Law From many names, one Truth is born, From countless paths, one silent Light; No creed can cage the Infinite, No border bind the soul’s clear sight.…
जिन्दगी भूमिका - जीवन से संवाद करती हुई यह रचना स्त्री-मन की उस अदम्य चेतना को उद्घाटित करती है, जो पीड़ा, बंधन, उदासी और नकारात्मकता के हर प्रहार को आत्मबल,…
'अक़्सर' अक़्सर हम वहीं मिलते हैं, जहाँ से हमें जाना था, उन्हीं पुराने रास्तों पर, जिन्हें पीछे छोड़ आना था। ज़िंदगी के फ़लसफे भी बड़े अजीब हैं साहिब, जिसे भूलना…
सार छंद ।।तिलक।। मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें। तिलक लगाकर प्यारा इससे, खुशियाँ घर-घर लायें।। बलिदानों की धरती है ये, वीरों की निज माता। इस पर…
नव वर्ष २०२६ की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई (भूमिका) सेवानिवृत्ति किसी कर्मयात्रा का विराम नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व हुई चेतना के नवसृजन का स्वर्णिम अवसर है। वर्षों तक लोकहित…
आमंत्रण उलझन सुलझन के लिए आदरणीय संपादक महोदय... आदाब/नमस्कार 😊, दिनांक 28 दिसंबर, 2025, रविवार को दोपहर 2.30 बजे हाजी आदिल चौधरी मार्केट , लिसाड़ी गेट , मेरठ पर एक…
मुस्कुराया कीजिए हर रोज़ बे वजह ही सही......... सौ गुना बढ़ जाती है खुबसूरती महज मुस्कुराने से, फ़िर भी लोग बाज नहीं आते मुंह फुलाने से। मुस्कुराहट वो तावीज है…