कविता

कविता

नए दौर की नारियाँ लिख रहीं इतिहास नए दौर की नारियाँ दौर-ए-उल्फत में हुईं बहुत सी रुसवाइयाँ नहीं पाँव ज़मीं पर पंख लगा उड़तीं आसमां में अब तोड़ रही हैं…

हर बात शब्दों से कही जाए, यह ज़रूरी तो नहीं…   कुछ भाव संकेतों में भी होते हैं, बस उन्हें समझने वाली संवेदना चाहिए।   शब्दों को तो हर कोई…

भक्ति जब मन में तुम उतर आते हो घंटियों की गूँज में ही भक्ति का स्वर नहीं होता, कभी मौन बैठे मन में भी तेरा नाम उतर आता है।  …
ग़ज़ल

ग़ज़ल

❤️दिली कैफ़ियत❤️ इस दिल की बात को कभी समझा तो कीजिए। मेरे दिल में फ़क़त आप हैं समझा तो कीजिए। हर ज़ख़्म तो मरहम का तलबगार नहीं है, कुछ ज़ख़्म…
कविता

कविता

प्रेम का नया सफ़र चलो फिर से एक नया सफ़र शुरू करें, कुछ अधूरे ख़्वाबों को फिर से पूरा करें। जो बातें रह गई थीं कभी कहे बिना, उन्हें आज…
शिक्षा बनाम अराजकता

शिक्षा बनाम अराजकता

शिक्षा बनाम अराजकता ऐसा क्यों हो रहा है शिक्षा बनाम अराजकता का मुद्दा अड़ा है क्या सच में हम शिक्षित होकर अराजक बन रहे शिक्षा शिक्षित कर रही या अराजक…
तस्वीर पर रचना

तस्वीर पर रचना

तस्वीर पर रचना हम साथ-साथ हैं राहें चाहे अलग-अलग हों, मंज़िल फिर भी एक है, धूप मिले या छाँव मिले, हाथों में हाथ हो तो हर मौसम नेक है। कभी…
कविता

कविता

फ्रिज़ की कहानी आधा कटा खीरा, घीया, टमाटर, पड़े मुरझाए आपस में लिपटकर, हो गए बासी, कोई खाना न चाहे अब, जब थे ताज़े, तब चाहते थे हमें सब। रख…
कविता

कविता

जब मैं थी ही नहीं — 1980 से आज तक कभी मन करता है समय की घड़ी को उलटा घुमा दूँ, आज की चमकती स्क्रीन से निकलकर सन् 1980 की…