14 सितंबर, हिन्दी दिवस पर साहित्यिक क्लब एम एम एच कॉलेज ग़ाज़ियाबाद में धूम धाम से मनाया हिन्दी उत्सव
मेरी बोली, मेरी पहचान
हिन्दी की लोकधाराओं का साहित्यिक उत्सव
14 सितम्बर 2026 को हिन्दी दिवस के अवसर पर लिटरेरी क्लब, एम.एम.एच. कॉलेज, गाज़ियाबाद द्वारा महाविद्यालय के सभागार में दोपहर 1:00 बजे से 2:30 बजे तक “मेरी बोली, मेरी पहचान : हिन्दी की लोकधाराएँ” विषय पर एक भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी भाषा के साथ-साथ उसकी विविध लोकधाराओं, बोलियों, लोक-स्मृतियों और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करना था। इस अवसर पर एल.आर. कॉलेज, गाज़ियाबाद, के.आई.ई.टी. यूनिवर्सिटी, गाज़ियाबाद तथा आर.सी.सी.वी. गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों ने विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया, जिससे कार्यक्रम को अंतर-महाविद्यालयीय स्वरूप प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति मुख्य अतिथि डॉ. सीता सागर, प्रख्यात कवयित्री एवं साहित्यिक साधिका, तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार सिंह, संयोजिका प्रो. सुरेखा अहलावत और निर्णायक मंडल के सदस्यों डॉ. परितोष मणि, प्रो. शुभाषिणी, प्रो. बीना शर्मा, प्रो. संध्या शर्मा तथा डॉ. राजेश कुमार शर्मा से रही। कार्यक्रम का संचालन साक्षी, (एम.ए.) द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ तिलक एवं मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसके पश्चात् विषय की संक्षिप्त भूमिका प्रस्तुत करते हुए हिन्दी की लोकधाराओं को हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक स्मृति का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। इसके बाद सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को साहित्यिक एवं आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के औपचारिक क्रम में विभिन्न अतिथियों एवं निर्णायकों का सम्मान सम्मान-पट्ट भेंट कर किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. संजय कुमार सिंह ने हिन्दी दिवस की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हिन्दी को केवल भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय समाज की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी के रूप में रेखांकित किया। इसके पश्चात् प्रतियोगिताओं का परिचय देते हुए प्रतिभागियों को समय-सीमा, मौलिकता, अभिव्यक्ति तथा भाषा, विषय-वस्तु और प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन की जानकारी दी गई। निर्णायकों का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य रहने की बात भी स्पष्ट की गई।
काव्य-पाठ प्रतियोगिता में समृद्धि सरोज (बी कॉम., एल.आर. कॉलेज), सृष्टि (बी.सी.ए., आर.सी.सी.वी. गर्ल्स कॉलेज), हर्ष शर्मा (एम.ए. प्रथम वर्ष, एम.एम.एच. कॉलेज), प्रियांशु सिंह (बी.एससी., एम.एम.एच. कॉलेज), आदित्य पंवार (बी.बी.ए., एम.एम.एच. कॉलेज) तथा कृष्णा (बी कॉम., एम.एम.एच. कॉलेज) ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्रियांशु सिंह, द्वितीय स्थान हर्ष शर्मा तथा तृतीय स्थान कृष्णा ने प्राप्त किया, जबकि सांत्वना पुरस्कार सृष्टि को प्रदान किया गया।
इसके बाद “मेरी बोली, मेरी बात” प्रतियोगिता के अंतर्गत लोककथाओं एवं एकल प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी लोकभाषाई एवं सांस्कृतिक संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। इसमें पलक कुमारी (बी.कॉम., एल.आर. कॉलेज), आदित्य राज (बी.टेक., के.आई.ई.टी. यूनिवर्सिटी), महक (बी.ए. द्वितीय वर्ष, एम.एम.एच. कॉलेज) तथा तुलिका श्रीवास्तव (एम.एम.एच. कॉलेज) ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आदित्य राज, द्वितीय स्थान महक तथा तृतीय स्थान तुलिका श्रीवास्तव ने प्राप्त किया, जबकि सांत्वना पुरस्कार पलक कुमारी को मिला।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित निबंध लेखन एवं पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिताओं में भी विद्यार्थियों ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया। निबंध लेखन में प्रथम स्थान नीतू वर्मा, द्वितीय अनुष्का राज तथा तृतीय अजय सिंह ने प्राप्त किया, जबकि आदित्य गहलोत, रमेश और साक्षी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। पुस्तक समीक्षा में प्रथम स्थान दिव्यांश शर्मा (एल.आर. कॉलेज), द्वितीय अदिति चौहान तथा तृतीय हर्षित ने प्राप्त किया, जबकि वंश सहरावत को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथि डॉ. सीता सागर, प्रख्यात कवयित्री एवं साहित्यिक साधिका ,का गरिमामय काव्य-पाठ रहा। डॉ. सीता सागर ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में हिन्दी दिवस की प्रासंगिकता, हिन्दी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा तथा लोकभाषाओं और बोलियों के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिन्दी को केवल संवाद का माध्यम न मानकर हमारी स्मृतियों, संवेदनाओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक अस्मिता की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् उनके भावपूर्ण काव्य-पाठ ने सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में भाषा, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय दिखाई दिया और कार्यक्रम को एक विशिष्ट साहित्यिक ऊँचाई प्राप्त हुई।
अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए तथा विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता, भाषिक कौशल और प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बनाया। इसके पश्चात् सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के साथ *समूह-चित्र* लिया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
समग्र रूप से यह आयोजन हिन्दी के साथ-साथ उसकी विविध लोकभाषाओं और बोलियों को सम्मान देने वाला एक सार्थक साहित्यिक प्रयास रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश सशक्त रूप से प्रस्तुत किया कि “बोली केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी जड़ों, स्मृतियों और पहचान की जीवंत धरोहर है।”
झलकियाँ

सूचना स्रोत

प्रस्तुति

