खुशियों की सौगात लेकर बहना राखी लाई,
दिल खिल गए भैया के, बहना जब है आई।
आई… आई… आई…
देखो राखी आई।
कभी बहन का रूठना, कहीं भाई का मनाना,
भाई के रूठने पर बड़ी बन फ़र्ज़ निभाना।
जाने कितने भावों से राखी उसने सजाई,
आई… आई… आई…
देखो राखी आई।
एक-दूजे की गलतियों को दोनों ही सँभालते,
नादानियाँ एक-दूजे की दोनों ही समझते।
दूर रहकर भी हर पल यादों में समाई,
आई… आई… आई…
देखो राखी आई।
बहन कहे—तू है मेरा चाँद, ओ भाई,
भाई कहे—तू मेरी शान है, बहना प्यारी।
भाई की कलाई पर जब राखी मुस्कुराई,
सुन बातें भैया की, आँख बहन की भर आई।
आई… आई… आई…
देखो राखी आई।
भाई-बहन दोनों ही हैं बचपन के साथी,
बचपन की यादें उनमें हर पल झिलमिलातीं।
अम्मा-बाबा दोनों की हैं प्यारी परछाई,
आई… आई… आई…
देखो राखी आई।
रचनाकार

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विजया डालमिया
संपादक मेरी निहारिका
राष्ट्रीय संयोजिका उलझन सुलझन महिला लेखिका प्रकोष्ठ

