रक्षा बंधन

रूठना-मनाना, हँसना-हँसाना,
बीते लम्हे फिर लौट के आएँ।
स्नेह की ये डोर कभी
होती न लाचार है।
धागों में बसी दुआ,
आँखों में प्यार है॥
दूर सही पर दिल से तो पास हैं हम,
एक-दूजे के हर सुख,दु:ख का रखते हैं ध्यान हम।
जब तक सूरज, चाँद, सितारे,
रहे अटल अपना ये प्यार है।
ईश्वर का सबसे सुंदर
रिश्तों में उपहार है।
डोर में बसी दुआ,
आँखों में प्यार है॥
राखी केवल धागा नहीं,
विश्वासों का संसार है।
बहना की मुस्कान में ही,
भैया का सारा प्यार है।
धागों में बसी दुआ,
आँखों में प्यार है,
राखी का ये बंधन कितना ख़ूबसूरत त्योहार है॥
प्रमिला त्रिवेदी
