विभाजन की त्रासदी
गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ एवं एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद के संयुक्त तत्वावधान में 14 अगस्त 2026 को कॉलेज परिसर में “भारत विभाजन : एक त्रासदी” विषय पर विभाजन की विभीषिका झेलने वाले विस्थापित परिवारों के साथ आत्मीय संवाद एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाजन पीड़ित परिवारों के सदस्यों को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया तथा उनके पूर्वजों द्वारा झेली गई त्रासदी की स्मृतियों और अनुभवों को साझा किया गया।
कार्यक्रम में पाकिस्तान के विभिन्न जनपदों से विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधि सर्वश्री राजेश मुंजाल, यशपाल अरोरा एवं विनोद लांबा सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे। उन्होंने अपने परिवारों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल दो देशों के बीच खिंची एक राजनीतिक सीमा नहीं था, बल्कि इसने असंख्य परिवारों के जीवन, सामाजिक ताने-बाने, आपसी भाईचारे और सदियों पुराने रिश्तों को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
विस्थापित परिवारों ने बताया कि विभाजन के दौरान उन्हें अपना बसा-बसाया घर-द्वार, खेत-खलिहान, संपत्ति और परिचित परिवेश ही नहीं छोड़ना पड़ा, बल्कि सदियों से चले आ रहे रिश्ते-नाते और सामाजिक संबंध भी एक झटके में बिखर गए। उनके द्वारा सुनाई गई पीड़ा और विस्थापन की मार्मिक गाथाओं ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। उनके अनुभवों ने यह स्पष्ट किया कि विभाजन की त्रासदी का दर्द केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी स्मृतियाँ आज भी अनेक परिवारों के जीवन में जीवंत हैं।
कार्यक्रम में एम.एम.एच. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक श्री सर्वेश कुमार सिंह, प्रो. राकेश कुमार राणा (मुख्य वक्ता), प्रो. क्रांति बोध सहित अन्य सम्मानित प्राध्यापक उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता प्रो. राकेश कुमार राणा ने विभाजन की ऐतिहासिक एवं मानवीय त्रासदी के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि “विभाजन को केवल राजनीतिक घटना के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे छिपे मानवीय दर्द, विस्थापन, बिछड़ाव और सामाजिक विघटन को समझना तथा आने वाली पीढ़ियों को इससे परिचित कराना भी आवश्यक है, ताकि इतिहास की ऐसी त्रासदियों से मानवता सीख ले सके।”
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमापूर्ण संचालन प्रो. बीना शर्मा ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और अतिथियों ने विभाजन पीड़ित परिवारों की स्मृतियों को गंभीरता से सुना और उनके संघर्ष तथा धैर्य के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
यह आयोजन न केवल विभाजन की विभीषिका को स्मरण करने का अवसर बना, बल्कि नई पीढ़ी को यह संदेश देने का माध्यम भी बना कि इतिहास की त्रासदियों को याद करना केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि वर्तमान में मानवीय संवेदना, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की जिम्मेदारी को समझना भी है।
झलकियाँ

सूचना स्रोत

एम एम एच महाविद्यालय, ग़ाज़ियाबाद
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