आजादी अभी बाकी है
हमने जंजीरें तोड़ दीं,
पर एक सवाल अभी बाकी है—
क्या हर इंसान के हिस्से में
सचमुच आज़ादी बाकी है?
जब बेटी बेखौफ चले,
जब बेटा आँसू पीना छोड़ दे,
जब भूख किसी की नींद न छीने,
कोई किसी को छोटा न समझे—
तभी तो होगी आज़ादी पूरी,
तभी तिरंगे की शान होगी।
सरहद पर जो वीर खड़े हैं,
वो हमसे कुछ कहते हैं—
“हमने देश तुम्हें सौंपा है,
अब तुम इसे सँवारना।”
नफरत की दीवारें तोड़ो,
दिल में भारत को जोड़ो,
अपने हिस्से की जिम्मेदारी
आज ज़रा-सी सब ओढ़ो।
…क्योंकि आज़ादी केवल
एक तारीख का उत्सव नहीं,
ये हर दिन निभाया जाने वाला
एक पवित्र संकल्प है।
आओ आज तिरंगे के नीचे
इतना-सा प्रण कर लें—
देश बदलने की बात नहीं,
पहले खुद को बदल लें।
और फिर देखना…
जिस भारत का सपना वीरों ने देखा था,
वो भारत
हमारी आँखों के सामने
सच होता नज़र आएगा।
जय हिंद! 
सृजक

प्रस्तुति


