मुशायरा

मुशायरा

एक शाम देश के शहीदों के नाम 

हमखयाल फाउंडेशन के तत्वाधान में एक कवि सम्मेलन मुशायरा का आयोजन इरशाद बेताब के संयोजन और सरपरस्त हाजी आदिल चौधरी (मेरठ महानगर अध्यक्ष समाज वादी पार्टी) के संरक्षण में किया गया जिसका शुभारंभ मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री जनाब परवेज़ आलम साहब ने दीप प्रज्वलित कर किया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मेरठ बार एसोसिएशन, मेरठ के अध्यक्ष श्री अनुज शर्मा रहे जिन्होंने देश की एकजुटता पर व्याख्यान पार्टस किया और आजादी और आज के हालात पर भी बताया और कहा कि देश में सभी को प्रेम भाव से रहना चाहिए ।

उसके बाद नात ए पाक और सरस्वती वंदना के बाद कविता और शायरी का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसमें श्रोतागण आनंदित होते चले गये ।

दिल्ली से आये मशहूर शायर डॉक्टर खालिद आजमी ने अपने बेहतरीन संचालन से श्रोताओं का दिल जीत लिया! उनके शेर

वो अगर ज़ुल्म की ताक़त पे उतर आयेंगे

हम कलंदर हैं बगावत पर उतर आयेंगे।

पर उनको बहुत दाद मिली ।

इंकलाबी शायर इरशाद बेताब ने पढ़ा कि

किसी पदचिन्ह पर चलना कहाँ आसान होता है।

कि इस रस्ते में तन-मन-धन का भी बलिदान होता है।

जवाँ कोई जो चढ़ जाता है सूली पर भगत सिंह-सा।

कि तब जाकर कहीं आजाद हिंदोस्तान होता है।

खतौली से आये शायर परवेज़ ग़ाज़ी ने पढ़ा कि

शायद कोई दरख्त हो जिस पर नहीं थे हम

आज़ादी ए चमन को भी रुस्वा नहीं किया

तनक़ीद करने वाले तू तारीख़ पढ़ के देख

हमने वतन के वास्ते क्या क्या नहीं किया ।।।

कवि डॉक्टर सुदेश यादव ‘दिव्य’ जी ने पढ़ा कि

जो तिरंगे को ऊँचा उठाकर गए।

दुश्मनों के जो छक्के छुड़ाकर गये।

उन शहीदों को मेरा है शत-शत् नमन।

देश पर जान अपनी लुटा कर गए।।

कवि चंद्रशेखर ‘मयूर’ ने पढ़ा कि

सुफल होती है ये आँखें नमन करके शहीदों को।

करूँ चरणों में मैं अर्पण फूल मन के शहीदों को।

वतन की राह पर जाकर लौट के घर नहीं आए।

जलाकर दीप पूजा के करूँ अर्पण शहीदों को।

डॉक्टर ईश्वरचंद गंभीर ने पढ़ा कि

कलम है हाथ में जब तक वतन के गीत लिखूँगा।

महकता है जो मोहब्बत से चमन के गीत लिखूँगा।

भले हम रोज़ लड़ते हैं परस्पर फिर भी जब तक हैं।

मैं समरसता तिरंगे के अमानक गीत लिखूँगा।

और अंत में अध्यक्षता कर रहे कवि यशपाल कोत्सयायन ने अपनी कविता पढ़कर श्रोताओं में जोश भर दिया! अंत में कार्यक्रम आयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त किया और सतीश सहज , दिव्यांश टंडन , नायाबुद्दिन नायाब, परवाना मेरठी, ने भी अपनी अपनी रचनाएं पढ़ कर श्रोताओं में बहुत दाद वसूल की ।

कार्यक्रम में इसरार अली एडवोकेट , सुशील जैन एडवोकेट , राघव शर्मा एडवोकेट , शेर जमा खान एडवोकेट आदि उपस्थित रहे ।

झलकी

सूचना स्रोत

इरशाद बेताब

प्रस्तुति

उलझन सुलझन