एक पाती हिंदी के नाम
मेरी प्यारी सखी,
हिन्दी
कैसी हो तुम?
इस बार मैं तुम्हारा जन्मदिन भूल गई। पर आज तुम्हें दिल से जन्मदिन की बधाई देती हूँ।
लेकिन कभी-कभी सोचती हूँ—अच्छा ही हुआ, मैं तुम्हारा जन्मदिन भूल गई।
क्योंकि तुम्हें तो हम केवल इसी एक दिन याद करते हैं। तुम्हारे जन्मदिन पर बड़े-बड़े संदेश लिखते हैं, कविताएँ रचते हैं, तुम्हारी महिमा गाते हैं और फिर अगले ही दिन तुम्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जैसे विदा कर देते हैं।
तुम्हारा स्थान धीरे-धीरे किताबों के पन्नों, साहित्यकारों के लेखों और पत्र-पत्रिकाओं के कॉलम तक सिमटता जा रहा है। हमारी बोलचाल की भाषा में तुम्हारी जगह कम होती जा रही है।
राजभाषा ने तो अपना स्थान बना ही रखा है, लेकिन अब अंग्रेजी ने भी हमारे घरों में अपना अधिकार जमा लिया है। घर की बातचीत में, बच्चों की पढ़ाई में, माता-पिता की बोलचाल में—हर जगह अंग्रेजी के शब्द सहजता से घुलते जा रहे हैं।
मुझे डर लगता है, मेरी सखी!
कहीं ऐसा न हो कि आने वाली पीढ़ी तुम्हें केवल किताबों में पढ़े, तुम्हारी कविताएँ पाठ्यक्रम में देखे और तुम्हारे बारे में भाषण दे, लेकिन तुम्हें अपने जीवन की सहज भाषा के रूप में अपनाना भूल जाए।
हिंदी केवल एक भाषा नहीं है। यह हमारी भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इसमें माँ की ममता है, दादी की कहानी है, गाँव की मिट्टी की खुशबू है, रिश्तों की मिठास है और अपनेपन की वह अनुभूति है, जिसे किसी दूसरी भाषा में उसी सहजता से व्यक्त करना कठिन है।
हमें अंग्रेजी सीखने से कोई परहेज नहीं होना चाहिए। दूसरी भाषाएँ सीखना ज्ञान का विस्तार है। लेकिन दूसरी भाषा सीखने के लिए अपनी भाषा को भूल जाना कहाँ की समझदारी है?
हिंदी को बचाने के लिए केवल हिंदी दिवस मनाना पर्याप्त नहीं है। उसे अपने घर की बातचीत में लाना होगा, बच्चों से हिंदी में बात करनी होगी, हिंदी में पढ़ना होगा, लिखना होगा और सबसे जरूरी—हिंदी बोलने में संकोच नहीं, गर्व महसूस करना होगा।
मेरी प्यारी हिंदी सखी,
तुम्हें जन्मदिन की बधाई देने के साथ-साथ आज मैं तुमसे एक वादा करना चाहती हूँ—
तुम्हें केवल एक दिन याद नहीं करूँगी,
तुम्हें अपने हर दिन का हिस्सा बनाऊँगी।
क्योंकि तुम्हारा अस्तित्व केवल साहित्यकारों की कलम में नहीं,
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में होना चाहिए।
तुम जियो, खिलो और हमारी आने वाली पीढ़ियों की जुबान पर उसी आत्मीयता से बनी रहो—यही तुम्हारे जन्मदिन पर मेरी सच्ची शुभकामना है।
तुम्हारी चहेती सखी

सुषमा दामोदर लाहोटी
स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन
बेलमपल्ली महिला प्रकोष्ठ (तेलंगाना)
प्रस्तुति

