नवदुर्गा

नवदुर्गा के नौ रूपों से और
एक नारी का जीवन चक्र का
प्रतिबिम्बं झलकता है।
नारी जब जन्म लेती है तो शैलपुत्री का रूप होती है।
कुमारी का है तो वह बृह्मचारिणी का रूप होती है।
किशोरी अवस्था में है तो वह
चद्रघंटा का रूप होती है।
नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करती है तो कुष्मांडा का रूप होती है।
संतान को जन्म देने के बाद में वह
स्कंदमाता का रूप होती है।
संयम को धारण करने वाली
कात्यायनी का रूप होती है।
अपने स्कल्प से अपने परिवार की रक्षा करने वाली
कालरात्रि का रूप होती है।
अपने परिवार को ही अपना सर्वस्व मानने वाली
महागौरी का रूप है।
अपनी संतान को रिद्धि सिद्धि का आशीर्वाद देने वाली सिद्धीदात्री का रूप होती है।
और ऐसे सारी सृष्टि में व्याप्त है मां दुर्गा की शक्ति
जय माता रानी की।
प्रमिला त्रिवेदी ।
