आत्मबल
कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति

आत्मबल

।।आत्मबल।।

तू कर तन्हा मुझे

मैं खुद से बतियाऊँगी

तू भर आँखों में उदासी की शाम का धुंधलका

मैं होंठों पे मुस्कान का सूरज उगाऊँगी

तू लगा पैरों में बदिंशों की साँकलें

मैं मन के आकाश में उड़ान भर आऊँगी

तू उडेल राहों में नफरतों का ज्वालामुखी

मैं प्रेम के दरिया सी बह जाऊँगी

तू खड़े कर निराशा के पहाड़

मैं आशा के झरने सी फूट आऊँगी

तू कर लाख कोशिश, मुझे मिटाने की जिन्दगी

मैं फिर भी तुझे खुद में जीकर ही जाऊँगी

रचनाकार

प्रमिला त्रिवेदी

प्रस्तुति

कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति
सहयोगी