मातृ सम्मान समारोह

मातृ सम्मान समारोह

माँ ही मेरी सृष्टि, माँ ही आदि-अनंत विधान

छत्तीसगढ़ साहित्य संगिनी ने मनाया मातृ सम्मान समारोह

रायपुर। “शब्दों में वंदना, हृदय में सम्मान; माँ ही है मेरी सृष्टि, माँ ही आदि-अनंत विधान।” कवयित्री सीमा पाण्डेय के इस प्रेरक स्लोगन को 12 मई को छत्तीसगढ़ साहित्य संगिनी की सदस्यों ने “एक शाम माँ के नाम” कार्यक्रम में पूरी जीवंतता के साथ साकार कर दिया। वृंदावन हॉल में आयोजित इस समारोह का मुख्य आकर्षण रहीं कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हमारी माताएं जो स्वयं एक विशेष पहचान रखतीं हैं। कार्यक्रम में आदरणीया शशि सुरेंद्र दुबे, आशा मानव मैडम, शेफाली चक्रवर्तीजी, सुमन शर्मा बाजपेयी जी, कंचन सिंह जी, प्रमदा ठाकुर जी, डॉ. प्रभा शुक्ला जी, माधुरी शुक्ला जी एवं नीलिमा मिश्रा जी उपस्थित रहीं। इन विदुषी माताओं के आशीष से संपूर्ण वातावरण वात्सल्यमयी हो उठा।

संगिनियों की सक्रिय सहभागिता रही विजया ठाकुर जी के मार्गदर्शन में एवं रूनाली चक्रवर्ती, अंजू पाण्डेय आदि सखियों के सहयोग से यह आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन नेहा त्रिवेदी ने किया, जबकि इस अवसर पर साहित्य संगिनी परिवार की सदस्य – अनामिका शर्मा, बलजीत कौर, श्रद्धा पाठक, मंजूषा अग्रवाल, अंजू पाण्डेय, मंजू सरावगी, शालिनी दुबे, शशि शर्मा, प्रीति रानी तिवारी, स्निग्धा शर्मा, कल्याणी तिवारी, सोनाली अवस्थी, सुषमा बग्गा, डॉ. सरोज दुबे, नंदिनी लहेजा, पूर्वा श्रीवास्तव, कंचन चौहान, कल्पना लुनिया, मयूराक्षी मिश्रा, अपर्णा द्विवेदी अंजन, डॉ साधना कसार, शालू सूर्या, भव्या सूर्या, डॉ. गोपा शर्मा, नीता झा, शशिकला त्रिपाठी, शालिनी दुबे जी, कुंदन सिंह, संध्या उपाध्याय एवं मधुबाला तिवारी आदि सदस्यों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

साहित्य और संवेदना के इस अद्भुत संगम में उपस्थित माताओं का अभिनंदन कर उनके आशीर्वाद को छत्तीसगढ़ साहित्य संगिनी संगठन की सबसे बड़ी पूंजी बताया गया।

झलकियाँ

सूचना स्रोत 

श्रीमति सीमा पाण्डेय जी

स्थानीय सम्पादिका

उलझन सुलझन (लेडीज विंग)

रायपुर (छत्तीसगढ़)

प्रस्तुति