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“जियो और जीने दो के भाव से बहाल होगा पर्यावरणीय न्याय”: डॉ. हरीश शर्मा

एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद में दिनांक 28-02-2026 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव डॉ. हरीश शर्मा ने कहा कि पर्यावरणीय न्याय “जियो और जीने दो” के सिद्धांत से ही संभव है। उन्होंने कहा कि समाज से लेकर सरकार तक सहयोग, सुरक्षा और संरक्षण का वातावरण बनाकर ही एक आदर्श मॉडल स्थापित किया जा सकता है।

प्रातः 10 बजे से व्याख्यान एवं शोध-पत्र प्रस्तुतियों का सत्र आरंभ हुआ। ऑडिटोरियम, कुंवर बेचैन हॉल, आई.क्यू.ए.सी., सी.एल.टी., पी.एल.टी., रमन हॉल (भौतिक विज्ञान विभाग), बॉटनी लैब तथा बी.सी.ए. भवन में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन व्याख्यान और शोध-पत्र वाचन आयोजित किए गए। संगोष्ठी का औपचारिक प्रारंभ प्रातः 10 बजे ऑडिटोरियम में हुआ।

प्रोफेसर प्रकाश चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में डॉ. सुखदेव प्रजापति ने रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर अपने विचार रखे। उनका कहना था कि रासायनिक उर्वरकों की अधिकता से पैदावार की गुणवत्ता प्रभावित होती है। डॉ. प्रदीप कुमार ने विभिन्न देशों की जलवायु परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए विकसित भारत की पर्यावरणीय समस्याओं एवं उनके समाधान पर विचार प्रस्तुत किए। इंजीनियर आर.के. त्यागी ने जलवायु परिवर्तन के विविध आयामों को पंचतत्व—जल, पावक, गगन, समीर और पृथ्वी—के संदर्भ में स्पष्ट किया। सत्र के अंत में प्रो. प्रकाश चौधरी ने अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

प्रातः 10:31 से 11:40 बजे तक ऑफलाइन पोस्टर प्रस्तुति आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर मोनिका शर्मा ने की तथा प्रतिवेदक प्रोफेसर गीता शर्मा रहीं। इस दौरान प्रकृति, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन तथा उससे उत्पन्न समस्याओं और उनके समाधान से संबंधित 20 से अधिक पोस्टर प्रस्तुत किए गए।

समानांतर रूप से प्रातः 10 बजे से ही प्रोफेसर सुता कुमारी की अध्यक्षता में बी.सी.ए. भवन में ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुति आरंभ हुई, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र की प्रतिवेदक प्रोफेसर आभा दुबे रहीं। इस अवसर पर डॉ. जय प्रकाश ने ‘इमर्जिंग फोटोकेटलिस्ट’ विषय पर विस्तार से चर्चा की तथा प्रतिभागियों के प्रश्नों का तार्किक एवं व्यवस्थित उत्तर दिया।

इसी क्रम में प्रातः 10 बजे से 11:40 बजे तक पी.एल.टी. में ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुति आयोजित हुई। इस सत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर जमुना प्रसाद एवं प्रतिवेदक प्रोफेसर राखी द्विवेदी थीं। इस सत्र में डॉ. गौरव त्यागी (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली) ने आर्कटिक पॉलिसी पर विस्तृत चर्चा की तथा आई.आई.टी.एम. पुणे के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक सुरेश तिवारी ने ब्लैक कार्बन एवं एरोसोल द्वारा पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन का प्रकृति, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, जलवायु अनुकूलन क्षमता, जलीय जीवन पर प्रभाव तथा माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

दोपहर 12:00 से 1:45 बजे तक ऑडिटोरियम में प्रोफेसर प्रकाश गार्गी चौधरी की अध्यक्षता में ऑफलाइन पेपर प्रस्तुति आयोजित हुई, जिसमें 10 से अधिक शोध-पत्र पढ़े गए। इस सत्र की प्रतिवेदक प्रोफेसर गार्गी रहीं। इसी समय बी.सी.ए. भवन में प्रोफेसर अरुण कुमार (प्राचार्य, ए.एस.पी.जी. कॉलेज) की अध्यक्षता में ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुति हुई, जिसमें 8 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।

दोपहर 2:16 से 3:40 बजे तक बी.सी.ए. भवन में आयोजित ऑफलाइन सत्र में 5 प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर मृदुला वर्मा एवं प्रतिवेदक प्रोफेसर सुरेखा अहलावत रहीं। इस दौरान डॉ. अनुपम सनी (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने जलवायु परिवर्तन का पर्यावरण पर प्रभाव विषय पर व्याख्यान दिया तथा बताया कि बदलती जलवायु से कीट-पतंगे, प्रकृति और वातावरण किस प्रकार प्रभावित होते हैं।

भौतिक विज्ञान विभाग में ऑनलाइन पोस्टर प्रस्तुति सत्र भी सम्पन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर सुनीता सिंह ने की तथा प्रतिवेदक प्रोफेसर अर्चना सिंह रहीं। इसमें तीन प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसी विभाग में प्रोफेसर शैलेन्द्र गंगवार की अध्यक्षता में ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुति भी आयोजित हुई, जिसमें प्रोफेसर सत्येंद्र पाल ने प्रख्यात वैज्ञानिक सी.वी. रमन के कार्यों पर चर्चा की तथा प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार ने प्रतिवेदन का दायित्व निभाया।

द्वितीय पोस्टर प्रस्तुति सत्र (12:30 से 1:45 बजे) बॉटनी लैब में सम्पन्न हुआ। इस सत्र की चेयरपर्सन प्रोफेसर सुभाषिनी शर्मा रहीं। कुल 22 प्रतिभागियों ने सम्मेलन की थीम के अनुरूप विभिन्न विषयों पर पोस्टर के माध्यम से प्रस्तुति दी और पर्यावरणीय जागरूकता तथा चुनौतियों के समाधान भी सुझाए।

महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापकों ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया, जिनमें प्रोफेसर मृदुला वर्मा, प्रोफेसर रत्ना शैरी, प्रोफेसर सीमा शर्मा, प्रोफेसर विनीता धीरन, प्रोफेसर मीनाक्षी सक्सेना, प्रोफेसर मधु श्रीवास्तव, प्रोफेसर गीता शर्मा, प्रो. परितोष मणि, डॉ. हेमेंद्र, डॉ. प्रीति शर्मा, डॉ. अनुपमा, डॉ. आरती सिंह तथा डॉ. रीमा उपाध्याय प्रमुख रहे। निर्णायक मंडल में डॉ. संजीत सिंह, डॉ. अजय राकेश, डॉ. सीमा कोहली, डॉ. पवन कुमार एवं डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में रिपोर्टर की भूमिका श्री सूर्य प्रकाश ने निभाई। इस प्रकार ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से लगभग तीन सौ शोध-पत्रों एवं पोस्टरों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ हुईं।

समापन सत्र में महाविद्यालय के सचिव श्री अभिनव कृष्ण, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राजपाल त्यागी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर प्रकाश चौधरी, मुख्य अनुशासन अधिकारी प्रोफेसर आर.एस. यादव, प्रोफेसर रोजी मिश्रा तथा डॉ. हरिदत्त शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह ने प्रबंधन समिति के सचिव को शाल ओढ़ाकर, स्मृति-चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

इसी क्रम में मुख्य अतिथि, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव डॉ. हरीश शर्मा को भी प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह द्वारा शाल, स्मृति-चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने प्रभावशाली वक्तव्य में डॉ. हरीश शर्मा ने पर्यावरण प्रदूषण के कारकों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है; केवल सरकारी प्रयासों से यह संभव नहीं है। उन्होंने कई उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि अक्सर जनता अपनी जिम्मेदारी सरकार पर छोड़ देती है, जबकि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निर्धारित कर ले, तो पर्यावरण के प्रति न्याय स्वतः स्थापित हो सकता है। उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि सरकार योजनाएँ प्रारंभ करती है, पर उन्हें व्यवहार में लाना समाज की जिम्मेदारी है, इसलिए आत्म-नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रोफेसर रोजी मिश्रा ने प्रस्तुत की। पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। विजेताओं को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

भारती, सुहानी, शिल्पी जैन, आस्था आदि विद्यार्थियों को संगोष्ठी में सक्रिय सहयोग हेतु पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर प्रकाश चौधरी ने संगोष्ठी की सफलता पर प्रबंधन समिति के सचिव अभिनव कृष्ण के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्राचार्य प्रोफेसर संजय कुमार सिंह ने संगोष्ठी के सभी पदाधिकारियों, सहयोगी सदस्यों एवं महाविद्यालय परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा सहयोगी सदस्यों की सराहना करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की।

झलकी

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सूचना स्रोत

प्रो. (डॉ) राकेश राणा जी

पाठ्य उन्नयन और प्रस्तुति

कल्पनाकार है शब्दशिल्प
चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)