राष्ट्र निर्माण की मार्गदर्शिका है नई शिक्षा नीति
– प्रो. अखिलेश मिश्रा
आज दिनांक 27 मार्च को एम. एम. एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के जंतु विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी का आयोजन नई शिक्षा नीति-2020: अवसर और चुनौतियाँ विषय पर किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अथिति एन. आई. ओ. एस. के चेयरमैन प्रो. अखिलेश मिश्रा जी ने संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर सतीश कुमार ने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संजय सिंह और प्रबंध समिति के सचिव श्री अभिनव कृष्णा जी के साथ ऑडोटोरियम में माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता प्रो. शांतेश् सिंह और महाविद्यालय के डीन भी उद्घाटन सत्र में मंचासीन रहे। प्राचार्य जी ने स्वागत भाषण के साथ सभी अथितियों का अभिनंदन किया। तत्पश्चात सभी मंचासीन अथितियों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी का संचालन डॉ मंजू भास्कर जी ने किया। प्रो. रोज़ी मिश्रा ने सभी अथितियों का मंच से परिचय कराया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ रश्मि सिंह ने संगोष्ठी विषय पर सभागार में विषय को सबके सामने प्रस्तुत किया। अगले दो दिन तक विचार संबोधित में जिन मुख्य बिंदुओं पर विचार विमर्श होना है उन्हें विस्तार से रखा। वही उद्घाटन सत्र में सम्मानित अथिति आदरणीय भरत लाल, सचिव, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने संगोष्ठी में विस्तार से अपने विचार शिक्षा के सामाजिक महत्व पर रखे।
संगोष्ठी के मुख्य अथिति प्रो. अखिलेश मिश्रा ने कहा कि “किसी देश की शिक्षा नीति, उस राष्ट्र के निर्माण की धुरी होती है। नयी सदी के लिए मार्ग-दर्शिका का काम करेगी, नई शिक्षा नीति।
विशिष्ट वक्ता प्रो. सतीश कुमार ने देश की नई शिक्षा नीति को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के की-नोट स्पीकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ शांतेश् सिंह ने अपने व्याख्यान को नई शिक्षा नीति से उभरने वाले अवसरों पर केंद्रित रखा। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि “शिक्षा को अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के साथ विज्ञान और तकनीक को अपना आधार बनाना होगा।” महाविद्यालय के प्रबंध सचिव ने सबको संगोष्ठी की सफलता की शुभकामनायें देते हुए कहा “शिक्षा में भारतीयता के मूल्यों का समावेश नई शिक्षा नीति को अनोखा बनाता है। हमारे शिक्षण संस्थानों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना चाहिए।” सत्र के अंत में प्रो. रोजी मिश्रा जी ने बताया कि “संगोष्ठी के दोनों दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन समांतर रूप से होगा। सभी प्रतिभागी अपना शोध पत्र अपने निश्चित सत्र में प्रस्तुत करे। सभी शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और अथितियों का संगोष्ठी में सादर हार्दिक अभिनंदन है।”
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