बदलते दौर में विद्यार्थियों को नई तकनीक और शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों से जुड़ना होगा: मेजर जनरल (डॉ) प्रमोद सहगल
मुजफ्फरनगर। आज होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए दो सत्रों में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में विद्यार्थियों के लिए भारत में रोजगार के बेहतरीन अवसर तथा द्वितीय सत्र में शिक्षकों के लिए वर्तमान बदलते परिवेश में शिक्षकों से अपेक्षाएँ पर कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता मेजर जनरल (डॉ) प्रमोद सहगल (सेवानिवृत्त) उनकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रतिमा सहगल, प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया, श्रीमती रीता दहिया, स्वामी तेजेश्वरानन्द, जसवीर सिंह राणा, दिनेश शर्मा एवं विद्यालय के शिक्षकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
तकनीक और कौशल से खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मेजर जनरल (डॉ) प्रमोद सहगल ने कहा कि आज के आधुनिक एवं प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों को नई शिक्षा के आयामों, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) और नवीन तकनीकों से जुड़ना होगा। तकनीकी ज्ञान और कौशल ही रोजगार, स्वरोजगार तथा नवाचार के नए मार्ग खोल सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को फूड इंडस्ट्रीज, रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र, ऊर्जा क्षेत्र, कृषि की आधुनिक तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि रिसर्च, नवाचार और नए अवसरों का सृजन करने के लिए भी तैयार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। डिग्री के साथ.साथ विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशलए सॉफ्ट स्किल्स, सीखने की क्षमता, संवाद कौशलए आत्मविश्वास एवं समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। आज बड़ी संख्या में विद्यार्थी इंजीनियरिंग सहित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से निकल रहे हैं, लेकिन उनमें से अपेक्षाकृत कम विद्यार्थी ही अच्छी नौकरियों तक पहुंच पाते हैं। इसका एक प्रमुख कारण उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति का अभाव है।
शिक्षक विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल
द्वितीय सत्र में शिक्षकों को संबोधित करते हुए मेजर जनरल (डॉ) प्रमोद सहगल ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के लिए केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक रोल मॉडल होता है। शिक्षक की वेशभूषा, बॉडी लैंग्वेज, व्यवहारए आत्मविश्वास और भावनात्मक समझ विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव डालती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विद्यार्थी-केंद्रित होनी चाहिए। शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ ऐसा संवादपूर्ण वातावरण बनाना चाहिएए जिसमें विद्यार्थी बिना संकोच अपनी समस्याएँ साझा कर सकें। शिक्षकों को समय-समय पर विद्यार्थियों की व्यक्तिगत एवं शैक्षिक समस्याओं को समझकर उनका उचित मार्गदर्शन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चों के लिए शिक्षण को सरलए रोचकए व्यावहारिक एवं गतिविधि आधारित बनाने की आवश्यकता है। प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता और प्रक्रिया अलग होती हैए इसलिए शिक्षक को विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए। शिक्षा में सरल से कठिन की ओर बढ़ते हुए विद्यार्थियों को सफलता के लिए तैयार करना शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि एक शिक्षक को स्वयं भी निरंतर अपनी स्किल्स एवं कौशल का विकास करते रहना चाहिएए तभी वह विद्यार्थियों को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर पाएगा।
अच्छे विद्यार्थी के साथ अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना लक्ष्य हो
मेजर जनरल सहगल ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक या डिग्री प्राप्त कराना नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, मानवीय मूल्यों, जिम्मेदारीए अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी विकसित करनी चाहिए। शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब विद्यार्थी ज्ञान के साथ-साथ अच्छे इंसान के रूप में भी विकसित हों।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर संवाद किया और अपने प्रश्नों के माध्यम से रोजगार, कौशल विकास एवं आधुनिक शिक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की ओर से मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों को शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके मार्गदर्शन एवं बहुमूल्य समय के लिए आभार व्यक्त किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बदलते समय की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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