तिरंगा : युवाओं के नाम
युवा साथियो,
जब तिरंगा
आकाश में लहराता है,
तो उसकी फड़फड़ाहट में
केवल इतिहास की आवाज नहीं होती,
उसमें भविष्य की पुकार भी होती है।
वह पुकार
सीधे तुम तक आती है—
“क्या तुम तैयार हो
उस भारत के लिए
जिसका सपना तुम्हारे पूर्वजों ने देखा था?”
आज तुम्हारे हाथ में
सिर्फ मोबाइल नहीं,
एक पूरा युग है।
तुम्हारी उँगलियों की गति
दुनिया तक विचार पहुँचा सकती है,
तुम्हारी प्रतिभा
नई खोजों को जन्म दे सकती है,
तुम्हारा एक साहसिक विचार
किसी समस्या का समाधान बन सकता है।
लेकिन याद रखना—
तकनीक तुम्हें तेज बना सकती है,
दिशा तुम्हें स्वयं चुननी होगी।
तिरंगे का केसरिया
तुमसे कहता है—
सपने देखो,
लेकिन उनमें साहस भरो।
असफलता आए
तो टूटना मत।
रास्ता कठिन हो
तो रुकना मत।
श्वेत रंग
तुम्हें सिखाता है—
असहमति से मत डरो,
पर असहमति को
नफरत मत बनने दो।
सोशल मीडिया के इस दौर में
हर खबर सच नहीं होती,
हर वायरल बात सही नहीं होती।
सोचो, परखो,
फिर अपनी आवाज उठाओ।
हरा रंग
तुम्हें धरती की याद दिलाता है।
जिस भविष्य का सपना
तुम देखते हो,
वह भविष्य
स्वच्छ हवा,
निर्मल जल
और हरे जंगलों के बिना
अधूरा है।
इसलिए
एक पौधा लगाना
सिर्फ पर्यावरण का काम नहीं—
अपने भविष्य में
एक साँस बोना है।
और अशोक चक्र
तुमसे कहता है—
चलते रहो।
ज्ञान की ओर,
नवाचार की ओर,
चरित्र की ओर,
और उस भारत की ओर
जहाँ अवसर
सिर्फ कुछ लोगों का अधिकार न हो।
युवा होना
केवल उम्र का नाम नहीं।
युवा होना है—
प्रश्न करने का साहस,
सीखते रहने की जिज्ञासा,
गलती स्वीकार करने की विनम्रता
और सही काम के लिए
खड़े होने का हौसला।
देश को आज
सिर्फ नारों की जरूरत नहीं है।
उसे चाहिए
ईमानदार इंजीनियर,
संवेदनशील डॉक्टर,
जिम्मेदार वैज्ञानिक,
सृजनशील कलाकार,
मेहनती किसान,
निष्ठावान शिक्षक
और ऐसे नागरिक
जो अपने अधिकारों के साथ
अपने कर्तव्यों को भी समझें।
तुम्हारे सपनों में
भारत का कल छिपा है।
तुम्हारी मेहनत में
भारत की गति है।
तुम्हारे चरित्र में
भारत की पहचान है।
इसलिए जब तिरंगा देखो,
सिर्फ यह मत पूछो—
“देश ने मुझे क्या दिया?”
एक बार यह भी पूछना—
“मैं अपने देश को
क्या दे सकता हूँ?”
शायद तुम्हारा उत्तर
किसी नई खोज में हो,
किसी जरूरतमंद की मदद में हो,
किसी पेड़ को बचाने में हो,
किसी गलत सूचना को फैलने से रोकने में हो,
या बस अपने काम को
पूरी ईमानदारी से करने में हो।
याद रखना—
तिरंगा तभी ऊँचा होगा
जब युवा का चरित्र ऊँचा होगा।
आओ,
उसके नीचे खड़े होकर
सिर्फ जयघोष न करें।
एक संकल्प लें—
हम सपने देखेंगे,
हम सीखेंगे,
हम प्रश्न करेंगे,
हम सृजन करेंगे,
हम प्रकृति बचाएँगे,
हम नफरत से ऊपर उठेंगे
और अपने कर्मों से
भारत को मजबूत बनाएँगे।
क्योंकि
आज का युवा
सिर्फ भारत का भविष्य नहीं—
भारत का वर्तमान भी है।
और तिरंगा
आज ही तुम्हारी ओर देखकर
पूछ रहा है—
“मेरे रंगों को
तुम अपने जीवन में
कब उतारोगे?”

मात्राभार 16/11 तुकांत 2,1 सरसी छंद
तीन रंग का प्यारा झंडा, लेकर चले जवान। विजय पताका नभ में फहरी, भारत देश महान।।
सीना ताने आगे बढ़ते, रखते माँ का मान।
सीमा पर हैं कदम ठोंकते
वीरों की पहचान।।
हिमगिरि से सागर तक गूँजे,
उनका ही बलिदान।
आँधी, वर्षा, शीत लहर हो,
रुके नहीं अभियान।।
रहे तिरंगा ऊँचा सबसे,
यही रहे अरमान।
मातृभूमि की रक्षा करते ,
अर्पित तन-मन प्राण।।
केसरिया रंग त्याग सिखाता ,
श्वेत शांति की शान।
हरा रंग धरती की खुशियाँ,
भारत की पहचान।।
शौर्य ध्वज जब नभ में फहरे,
गूँजे जय-जयगान।
तीन रंग के पावन ध्वज पर,
न्यौछावर हर प्राण।।
सीमा की पावन धरती पर,
लिखते नया विधान।
मृत्यु सामने खड़ी रहे पर,
ऊँचा रहे निशान।।
सरहद प्रहरी जाग रहे हैं,
मातृभूमि की शान।
उनके साहस से रक्षित है,
मेरा हिंदुस्तान।।



