हस्तिनापुर साहित्य उत्सव 2026
एक भव्य आयोजन, ज्ञान और संस्कृति का संगम, देश भर के साहित्यकार कवि और चिंतक बड़ी संख्या में जुटे।
डॉ यतीन्द्र कटारिया की पुस्तक ‘हस्तिनापुर कल आज और कल’ सहित कई पुस्तकों का विमोचन
हस्तिनापुर के नजदीक स्थित ऐतिहासिक बहसूमा रियासत में क्षेत्रीय जनता व देश भर की साहित्यिक विभूतियों का भव्य समागम हस्तिनापुर के इतिहास में पहली बार आयोजित किया गया और इस हस्तिनापुर साहित्य उत्सव का साक्षी बना ग्राम हँसापुर।हस्तिनापुर साहित्य उत्सव का उद्घाटन पूर्व राज्यपाल (केरल एवं बिहार) आरिफ मोहम्मद खान, श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति डॉ राजीव त्यागी, पूर्व पुलिस महानिदेशक देवराज नागर व डॉ. वैदेही तामण द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
हस्तिनापुर की पावन ऐतिहासिक धरा पर आयोजित हस्तिनापुर साहित्य उत्सव अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप में प्रारंभ हुआ। महाभारतकालीन इस प्राचीन नगरी में सजे इस साहित्यिक महाकुंभ ने ज्ञान, संस्कृति और विचारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। हॅॅंसापुर बहसूमा रियासत हस्तिनापुर द्वारा आयोजित हस्तिनापुर साहित्य उत्सव २०२६ अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया गया तथा इस अवसर पर उद्घाटन सत्र के अवसर पर ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय पूर्व राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को चार चाँद लगा दिए। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि “हस्तिनापुर भारत की प्राचीन विरासत तथा आत्मबोध से विश्व बोध का संवाहक है। भारत की प्राचीन नगरी हस्तिनापुर में प्रथम बार आयोजित हस्तिनापुर साहित्य उत्सव साहित्य कला और सस्कृति का आधार बनेगा। हस्तिनापुर की बहसूमा रियासत का वैभवशाली इतिहास आधुनिक इतिहास का गौरव है तथा महाराजा जैत सिंह नागर से लेकर राजा नैन सिंह गुर्जर तक के समय का स्मरण करते हुए मुगल काल के संघर्ष व 1857 की क्रांति में उनके योगदान का स्मरण भी उन्होंने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने की, जिनके आध्यात्मिक सान्निध्य ने पूरे आयोजन को दिव्यता से भर दिया।
कार्यक्रम में सारस्वत अतिथि के रूप में श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति डॉ राजीव त्यागी ने हस्तिनापुर के संदर्भ में सनातन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए हस्तिनापुर महोत्सव की सराहना की।
मुम्बई से आई विख्यात लेखिका डॉ वैदेही तामण ने उत्सव का बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया।
हस्तिनापुर साहित्य उत्सव का मुख्य आकर्षण ‘आत्मबोध से विश्व बोध’ विषय पर आयोजित व्याख्यान रहा, जिसमें वक्ताओं ने आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागृति और वैश्विक चेतना के गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। विचारों की इस गहन धारा ने उपस्थित जनसमूह को आत्ममंथन और सकारात्मक जीवन दृष्टि के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का भव्य विमोचन भी किया गया, जिनमें डॉ यतीन्द्र कटारिया विद्यालंकार द्वारा लिखित ‘हस्तिनापुर: कल, आज और कल’, आदर्श कुमार जैनर द्वारा लिखित ‘अनुभूति’, डॉ वैदेही तामण द्वारा लिखित ‘वीर सावरकर’ व सुरेंद्र सिंह द्वारा लिखित ‘उजाले की ओर’ प्रमुख रहीं। इन कृतियों के माध्यम से हस्तिनापुर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समकालीन स्वरूप को उजागर किया गया, साथ ही साहित्यिक चेतना को नई दिशा प्रदान की गई।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन इस उत्सव का विशेष आकर्षण रहा, जिसमें देश भर से आए ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, भावपूर्ण और प्रेरणादायक रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हास्य, वीर, श्रृंगार और करुण रस की विविध प्रस्तुतियों ने वातावरण को सरस और जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ पवनपुत्र बादल सहित देश भर से अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रतिनिधि मौजूद रहे। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों को भी सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने साहित्य साधकों के प्रति समाज के सम्मान और कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया। उत्सव में श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के द्वारा अखिल भारतीय साहित्य परिषद के विभिन्न कार्यक्रमों में योगदान की भूरी भूरी प्रशंसा की गई।
कार्यक्रम का सफल आयोजन बहसूमा रियासत हस्तिनापुर एवं संबंधित साहित्यिक संस्थाओं के सहयोग से किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्यकार, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
समग्र रूप से यह साहित्य उत्सव न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक समृद्धि और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। हस्तिनापुर की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित यह उत्सव आने वाले समय में भी साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
हस्तिनापुर साहित्य उत्सव में मुख्य रूप से रजा लाइब्रेरी रामपुर के निदेशक डॉ पुष्कर मिश्रा, लेखक पवन कुमार (आईएएस), प्रोफेसर पुरुषोत्तम पाटिल, प्रोफेसर लहरी राम मीणा, डॉ प्रवीन सारस्वत, कुंवर दवेंद्र सिंह गुर्जर, सतीश कुमार, अशोक कुमार, महेश पांडे बजरंग, अशोक चौधरी, अरविंद भाटी, महाकवि देवेंद्र देव, मिर्जापुर एमएलसी और पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह, नितिन पोसवाल, कुलदीप नागर, आदेश कटारिया, प्रोफेसर बलजीत श्रीवास्तव, निरुपमा अग्रवाल आदि द्वारा विचार व्यक्त किए गए ।
कार्यक्रम संयोजक डॉ यतींद्र कटारिया ने कहा कि हस्तिनापुर में प्रति वर्ष ऐतिहासिक रूप से हस्तिनापुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जाएगा। कुंवर देवेंद्र सिंह द्वारा सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।
झलकियाँ


सूचना स्रोत
श्री यतेन्द्र कटारिया
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति


