शिव शंभू
कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति

शिव शंभू

शिव शंभू 

शिव शंभू, बोलो शिव शंभू।

बड़े हितकारी बड़े दयालु।

नाम जपो, तुम नाम जपो।

अलख निरंजन, सब दुःख भंजन।

सब संकट को पार लिए।

पीकर विष का विषम प्याला।

तन मन अपना कर लिया नीला।

शिव शंभू, बोलो शिव शंभू।

भांग पीये भोले, भस्म रमे।

दिन रात में में धूनी तपे।

कैलाश पर रहे विराजित।

साथ में लिए आदि शक्ति।

शीश मुकुट चंदा सोय।

जटाजूट से हर हर गंगा बहे।

चर निशाचर नाच दिखावे।

नंदी जिनकी शोभा बढ़ाए।

शिव शंभू, बोलो शिव शंभू।

मैं भी रटूं, शिव मैं भी रटूं।

शिव शिव रटकर खुद को तारूँ।

हे कृपानिधि तेरा जाप करूँ।

सब भक्तों की पीड़ा हर लो।

जो कोई आए शरण तुम्हारी।

उसकी अपनी छांव में रख लो।

आज तुम्हारी गाकर महिमा।

खुद को धन्य धन्य कहूँ।

शिव शंभू, बोलो शिव शंभू।🙏🙏

रचनाकार

सुनिता मीना

उपप्राचार्य

सवाई माधोपुर (राज.)

प्रस्तुति

उलझन सुलझन