शरद की रात आई है
शरद की रात आई है,
उमंगें दिलों में साथ लाई है..
हर दिल में उत्साह भरा है,
और चाँद यह सब देख अपनी,
सोलह कलाओं सहित खिला जा रहा है..
कहीं रास की तैयारी है,
तो कहीं खीर में केसर गमक रही है..
पकौड़ों की खुश्बू संग संगीत की धुन पर,
मच रहा है सबकी छतों पर शोर ही शोर..
मध्य रात्रि जब चाँद आएगा शबाब पर,
तब होगी देवताओं द्वारा अमृत की बरखा..
अमृत वर्षा में कर महा-स्नान,
दादी बगैर चश्मे के सुई में धागा पिरोएँगी ..
फिर खीर का अमृत मय प्रसाद, हम सबको खिलाकर..
शरद पूर्णिमा की बधाइयाँ बाँटेंगी…

सुषमा अग्रवाल नागपुर महाराष्ट्र
शरद पूर्णिमा का महारास
राधा-कृष्ण के प्रेम को समर्पित कविता
शरद पूर्णिमा की रात सुहानी,
चाँदनी में धरती नहाई।
यमुना तट पर बजे मुरलिया,
प्रेम की मधुर धुन छाई।
कदंब की डाली झूम उठी है,
महक उठी ब्रज की हर गली।
राधा के संग रास रचाने,
आए कुंज बिहारी वनमाली।
पायल छनके, घुँघरू बाजें,
प्रेम सुधा बरसाए श्याम।
राधा के मुख पर चंद्रमा दमके,
कृष्ण के अधरों पर मुस्कान।
चाँद निहारे रास की शोभा,
तारे करते प्रेम प्रणाम।
यमुना की लहरें गाएँ मिलकर,
राधे-राधे, श्याम-श्याम।
राधा प्रेम की अमर कहानी,
कृष्ण प्रेम का अनुपम सार।
एक हृदय की धड़कन राधा,
दूजे में मोहन का संसार।
नहीं अपेक्षा, नहीं कोई मोल,
प्रेम जहाँ निष्काम हुआ।
राधा-कृष्ण के दिव्य महारास में,
हर कण वृंदावन धाम हुआ।
आज भी शरद की चाँदनी में,
गूँज रही मुरली की तान।
मन की आँखें खोल के देखो,
रास रचाते नंदलाल।
राधा नाम प्रेम की भाषा,
कृष्ण नाम आनंद अपार।
शरद पूर्णिमा की पावन रजनी,
करती प्रेम-भक्ति का विस्तार।
राधे राधे! जय श्री राधा-कृष्ण!

स्थानीय संपादक, उलझन सुलझन, बेंगलुरु महिला प्रकोष्ठ
शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं💥
कभी शुभ्र चंद्रिकाओं संग इठलाता
कभी मेघों के अवगुंठन में छुप जाता
कभी तारों संग खेलता आंख मिचौली
कभी ज्योत्स्ना की गोद में सो जाता
कभी अमावस के नीरव तिमिर में खो जाता
कभी पूनम की रजत कौमुदी बन इतराता
षोडश कलाओं का श्रृंगारित परिधान ओढ़कर-
क्षिति- नभ दीप्त चंद्रमयूख संग झिलमिलाता–
सुधामयी इंदुप्रभा चहुदिशि, चहुंओर जगमगाएं 💥
शरद पूर्णिमा की सबको हार्दिक शुभकामनाएं 🌝
पूनम अरोड़ा
प्रस्तुति


