सावन की ये तीज आई
सावन की ये तीज आई,
फूल दिलों में खिल गए हैं।
बागों में पड़ गए झूले,
मन खाए हिचकोले।।
सावन की ये तीज आई…।
ठंडी हवाएँ जब शोर मचाएँ,
यूँ लगता जैसे कोई गीत सुनाएँ।
रुनझुन-रुनझुन बोले मेरी पायलिया,
सावन की ये तीज आई…।
आसमान में जब-जब बिजुरिया चमके,
सावन की फुहारें आकर तन को लिपटें।
मनवा कहे—ओ साजन,
बाहों में ले ले मोहे।।
सावन की ये तीज आई…।
अमवा की डाली पर कोयल मतवाली,
कहती है देखो, छाई हरियाली।
झूला झूलो अब सखियों,
कहती है मेरी बाली ।।
सावन की ये तीज आई…।
हरी चुनरिया यूँ लहर-लहराए,
कंगना खन-खन कर शोर मचाए।
गोरे-गोरे हाथों में देखो,
मेहंदी की लाली।।
सावन की ये तीज आई…।
ऐसे में जो दूर है अपने बलम से,
क्या गुजरे उन पर, पूछो बिरही मन से।
रिमझिम बरसे सावन,
घर आजा मनभावन।।
सावन की ये तीज आई,
फूल दिलों में खिल गए हैं।
बागों में पड़ गए झूले,
मन खाए हिचकोले।।
सावन की ये तीज आई…।

विजया डालमिया
उलझन सुलझन, राष्ट्रीय संयोजिका
महिला मीडिया प्रकोष्ठ
प्रस्तुति


