करवा चौथ
उलझन सुलझन

करवा चौथ

विशेष त्यौहारी सृजन

माथे की बिंदी कुमकुम
होठों  की आभा रक्तिम
उठती गिरती  हुई पलकें
घुंघराली काली लटें अलकें
गालों  की सिन्दूरी लाली
कानों  के झुमके बाली
आँखों में  सजता काजल
ठोड़ी के बीच का डिम्पल
चूड़ियों  की खनक झंकार
पायल  की मधुर छनकार
पिया  के नाम की मेंहदी
उसकी रंगत खुशबू महकी
लंहगे साड़ी की  शोभा
आभूषण गहनों की आभा
करके पूर्ण सोलह श्रृंगार
सब पूजा करने  को तैयार
दो दो चाँद का करना  दीदार
एक जमीन  पे एक आसमान

तुमसे ही सपने साकार
तुमसे ही सुर्खरू मेरे ख्वाब
तुमसे से ही मेंहदी की रंगत
तुमसे ही सर्वांग श्रृंगार
तुमसे ही रोशन घर आंगन
तुमसे ही परिवार आबाद
मैं “पूनम” तुम्हारे आसमां की
तुम मेरे हिस्से का “चांद”

पूनम के  चाँद बन के रहना सदाबहार
हर साल करूँ यूँ ही करवा-चौथ  का त्यौहार

हर सुहागन की यही मनोकामना
पति दीर्घायु हों,यही शुभकामना

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सृजन

पूनम अरोड़ा

प्रस्तुति

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