14 सितंबर, हिन्दी दिवस पर साहित्यिक क्लब एम एम एच कॉलेज ग़ाज़ियाबाद में धूम धाम से मनाया हिन्दी उत्सव मेरी बोली, मेरी पहचान हिन्दी की लोकधाराओं का साहित्यिक उत्सव 14…
हिंदी बड़े भाग्य मानुष तन पाया, हिंदुस्तान में बसेरा भाया। पढ़कर हिंदी,लिखकर हिंदी, भाषा का है मान बढ़ाया। हिंदी को वट वृक्ष बनाया, चहुँ दिशा में है फैलाया। जड़ों को…
महाशिवरात्रि आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच एक सरल सेतु डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ द्वारा व्यक्त गहन भावों को सरल शब्दों में समझें तो महाशिवरात्रि केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं है,…
आत्मकथ्य डॉ. अशोक कुमार चौधरी अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जनपदीय इकाई द्वारा आयोजित ‘संघ साहित्य एवं राष्ट्रभाषा’ विषयक विचार गोष्ठी में सम्मानित होना मेरे लिए केवल व्यक्तिगत गौरव का…
।।आत्मबल।। तू कर तन्हा मुझे मैं खुद से बतियाऊँगी तू भर आँखों में उदासी की शाम का धुंधलका मैं होंठों पे मुस्कान का सूरज उगाऊँगी तू लगा पैरों में बदिंशों…
मेरे कान्हा कुछ पंक्तियां, कान्हा के लिए। मोर मुकुट मुरलीधर की मनभावन, मनमोहन की मधुर धुन मधुरम- मधुरम प्रीत शरण है प्रीत झरण है प्रीत ही यमुना घाट पलकों के…
आत्मकथ्य | श्री संजीव कुमार नागर प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, नूरनगर, लिसाड़ी मैं मानता हूँ कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज, संस्कृति और संस्कारों से…
भूमिका यह कविता पन्ना धाय के अद्वितीय त्याग और राजधर्म के प्रति उनकी निष्ठा को आल्हा छंद की वीर रसात्मक लय में प्रस्तुत करती है। कवि श्योराज जी बम्बेरवाल ‘सेवक’…
मौन मौन के भीतर की आवाज। मौन, वीराने में मन का मीत है, मौन, जीवन का सुगम संगीत है। मौन, मूक अभिव्यक्ति तुम्हारे आमंत्रण की, मौन, पत्रिका मेरे नेह निमन्त्रण…
खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का समागम नई दिल्ली। खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज के प्रबुद्ध नागरिकों एवं सजातीय प्रतिनिधियों का एक महत्वपूर्ण समागम नई दिल्ली में संपन्न हुआ।…