पंचायत रा चुनाव (राजस्थानी हास्य एवं जागरूकता कविता) देखो पंचायता म सरपंच ही सरपंच खड़ा हो रिया छः, मोकला पीसा लगा र, गांव म सबस्यू बड़ा हो रिया छः, जो…
भारत की माटी, कला और संस्कृति के नाम कहीं बाँस की बारीक बुनावट, कहीं मिट्टी की सुंदर सजावट, कहीं लकड़ी पर उकेरे अरमान, कहीं रंगों में रची पहचान। हर राज्य…
राष्ट्रीय एकता दिवस आयोजित गाजियाबाद। 31 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के अंतर्गत एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई…
🇮🇳लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती🇮🇳 भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के महान शिल्पकार, अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति एवं राष्ट्रभक्ति के प्रतीक, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल…
'धन्यवाद सा' धन्यवाद सा धन्यवाद, उण सगला ने धन्यवाद, जो लाइसेंस लेकर गाड़ी चलावें, उण रा धन्यवाद, जो कटबा री गाया ने बचावें, उण रा धन्यवाद, जो बेटा संग बेटी…
आज दिनांक 29.03.2025, दिन शनिवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज के सभागार में विद्यालय का वार्षिक परीक्षाफल वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सहायक…
'स्वप्न सुन्दरी' सपने में आकर एक स्वप्न सुन्दरी बोली, मुझे बना लो तुम अपने जीवन की हमजोली, जीवन भर साथ रहूँगी, नहीं करूँगी मनमानी, आप मेरे राजा हो, मुझे बना…
आज दिनाँक 29.5.25 को लोंगवुड होटल ग्रेटर नोएडा में वरिष्ठ नागरिक समाज की वार्षिक आम सभा आयोजित की गई जिस में वरिष्ठ नागरिक समाज की वार्षिक पत्रिका 'मंजूषा' का विमोचन…
नया साल नई उमंगता, मन में भरता नव उत्साह। बीती बातें सोच नवीन, आया नूतन वर्ष वाह-वाह!! उत्सुकता से स्वागत करते, एक दूजे को देवे बधाई। घर-घर में पकवान बनाते,…
।। अपनी-अपनी राह।। 28-03-2025 मानव तेरी मानवता का, रंग तूने खूब जमाया, धर्म पुण्य का भेद बुलाकर, सब जीवों को है खाया, धन खाया, जमीन खाई, रिश्ते नाते, प्रेम को…
"श्रीमद्भगवतगीता में ही समाया है सम्पूर्ण जीवन!"- आचार्य श्रीराधाकृष्ण मनोडी जी "मानव जाति के लिए यदि कोई एक जीवन संहिता है या जीवन को दिशा देने वाला कोई एक ग्रंथ…
काँटों से डर जाने वाले, घावों को क्या जानेंगे। शब्द उधारी में लेते जो, भावों को क्या जानेंगे।। दो कौड़ी में बिकने वाले, दीप दिखाते सूरज को। लहरों से भय…
।।अपनी-अपनी राह।। ।।सच्चाई।। लिखना सब जानते हैं, पर पढ़ना जानता बिरला ही, बोलना सब जानते हैं, पर सुनना जानता बिरला ही, अरे! लिखने-बोलने से कुछ नहीं होता, ज्ञान के सागर…